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मान्यवर कांशीराम जी का जन्मः-

हर युग में हर देश में अमानवीय व्यवस्था के विरूद्ध मानव की पीडा के हरण के लिए कोई न कोई महामानव इस धरा पर अवतरित हुआ और उसने ऐसा अभियान चलाया कि अन्ततोगत्वा मानव को अन्याय व जघन्य अत्याचारो से मुक्ति मिली । उन्ही महामानव में से एक थे मान्यवर कांशीराम । जिन्होने अपने मानवीय कृत्यों से नये कीर्तिमान स्थापित कर विश्व में एक नई पहचान बनायी ।
पंजाब प्रान्त के रोपड जिले के ख्वासपुर गाॅव में 15 मार्च 1934 को एक अद्वितीय बालक ने जन्म लिया । माता विशन कौर और पिता हरिसिंह के घर जन्मे बालक का नाम कांशीराम रखा गया । यह कोई नही जानता था कि यह बालक एक दिन वर्ण व्यवस्था पर आधारित अमानवीय सामाजिक व्यवस्था को ध्वस्त कर देगा । बाबा साहब डा0 अम्बेडकर के मिशन को आसमान तक पहुॅचा देगा । यह बालक एक दिन भारतीय राजनीति की धुरी बनेगा । जिसके परिधि में तमाम राजनैतिक पार्टिया चक्कर काटेगी इनकी बनाई हुई बहुजन समाज पार्टी सत्ता के ताले की मास्टर चाभी बन जायेगी ।
बचपन
मान्यवर कांशीराम जी का जन्म एक साधारण परिवार में होने के कारण इनकी शिक्षा-दीक्षा स्कूल में हुई । जब मान्यवर कांशीराम जी 5 वर्ष के हुए तो वे घर से 2 किलो मीटर दूर स्थित मलकपुर गाॅंव के प्राइमरी स्कूल में पढने जाया करते थे । हाॅलाकि स्कूल में भी ऊँच-नीच का भेद-भाव जैसी समाजिक कुप्रथायें मान्यवर कांशीराम जी का पीछा नही छोडती थी । स्कूल में निम्न जाति के बच्चो को अलग से बैठाया जाता था ।
संघर्ष की राह
रोपड जिले से बी.एस.सी. करने के पश्चात सन् 1957 में मान्यवर कांशीराम जी पूना में ‘‘किर्की एक्सप्लोसिव रिसर्च एण्ड डेवलपमेन्ट लेबोरेट्री ‘‘ई.आर.डी.एल.‘‘में अनुसंधान सहायक पद पर नियुक्त हुए । और किन्ही कारणो से मान्यवर कांशीराम जी ने 6 वर्ष की सरकारी नौकरी से त्याग पत्र देकर अम्बेडकर मिशन के सजग प्रहरी के रूप में पूरे देश में समाजिक परिवर्तन के लिए जनजागरण यात्रा शुरू की ।

कठोर संकल्प की घड़ी

मान्यवर कांशीराम जी ने 24 पृष्ठो का एक ऐतिहासिक पत्र अपने परिवार वालो को लिखा । जिसे परिवार वाले पढ़कर खूब रोयें । उस पत्र में मान्यवर कांशीराम जी ने घर पर कभी न लौटने और आजीवन अविवाहित रहने की बात लिखी थी । साथ ही मान्यवर कांशरीराम जी ने देश भर के 85 प्रतिशत दलित पिछडे व अल्पसंख्यक वर्ग के अधिकारो के लिए संघर्ष करते रहने की बात कही थी । मान्यवर कांशीराम जी ने अपने जीवन को अपने परिवार तक की सीमित नही रखा बल्कि पूरे समाज के लिए समर्पित कर दिया ।

बहुजन आन्दोलन

आदिकाल से आज तक दलित शोषित व उपेक्षित वर्ग की दशा पर नजर डालने से पता चलता है कि अनेक परिवर्तनो के बावजूद इनकी स्थिति आज भी समाज के हाशिये पर जीवन व मौत के संघर्ष के बीच जूझ रही है । बाबा साहब डा0 भीमराम अम्बेडकर के द्वारा रचित भारतीय संविधान में शोषित व उपेक्षित वर्गो के अनेक अधिकार दिये ,फिर भी 60 वर्षो के बाद भी समाज व सत्ता पर कायम मनुवादी वर्चस्व के कारण ये संविधानगत अधिकार से अभी कोसो दूर है । हाॅंलाकि दलित, शोषित व उपेक्षित वर्ग के विकास मे राजनीतिक मांगो की ओर मोडने में बाबा डा0 भीमराव अम्बेडकर के बाद मान्यवर कांशीराम जी ने महत्वपूर्ण भूमिका ही नही निभाई बल्कि दलित , शोषित व उपेक्षित वर्ग में जन्मे महात्मा ज्येतिबाराव फुले,रामास्वामी पेरियार,नारायणा गुरू, माता सावित्री बाई, धोधीराम नामदेव आदि बहुजन नायको द्वारा दलित, शोषित व उपेक्षित वर्गो के आन्दोलन के विशेष योगदान को समाज के बीच रेखांकित करके बहुजन समाज पार्टी की स्थापना की , जिसने भारत देश में पहली बार दलित, शोषित व उपेक्षित वर्गो के आन्दोलन को नयी उचाईयां दी ।
समकालीन इतिहास में बाबा साहब डा0 भीमराव अम्बेडकर ,मान्यवर कांशीराम जी व मा0 बहन मायावती जी का उदाहरण विचार शक्ति का सबसे बड़ा ज्वलंत प्रमाण है जिसके कारण सामाजिक क्रान्ति हुई ।
सदियो से समाज की मुख्यधारा से कटे दलित ,शोषित,पिछडे व अल्पसंख्यक वर्ग को अंधेरे से उजाले की ओर ले जाने के लंबे संघर्ष में मान्यवर कांशीराम जी व बहन मायावती जी ने 14 अप्रैल 1984 को बाबा साहब डा0 भीमराम अम्बेडकर जयन्ती से सामाजिक परिवर्तन लाने के लिए ,जाति के आधार पर 6743 जातियों में तोडे गये 85 प्रतिशत बहुजन समाज के लोगो को संगठित करने का बीडा उठाया ।

कम्प्यूटरी दिमाग

मान्यवर कांशीराम जी की स्मरण शक्ति इतनी तेज थी वह उनकी खासियत में एक थी । स्मरण शक्ति के मालिक कहे जाने वाले मान्यवर कांशीराम जी अपने संगठन के कार्यकताओ का नाम हमेशा मुहजुबानी याद रखते । वे जिनसे एक बार मिल लेते ,उन्हे कभी नही भूलते । उनका नाम कम्प्यूटर की फ्लापी जैसा था जिसमें सबकुछ स्टोर रहता था व आन्दोलन कार्यक्रम तथा प्रचाारित किये जो रहे मुद्दो की रूपरेखा कम्प्यूटर की फ्लापी की तरह तुरन्त तैयार कर देते थे । उनके पास न कभी कोई डायरी रहती न ही किसी प्रकार की फाइल साथ होती थी व बहुजन मूमेन्ट के प्रति इतना अधिक समर्पित थे कि व हमेशा अपने मिशन के बारे में ही चिन्तन एवं मनन करते थे । ऐसी आश्चर्यजनक म स्मरण शक्ति किसी सामान्य व्यक्ति की नही हो सकती है । कोई महामानव एवं प्रतिभा सम्पन्न व्यक्ति ही ऐसी योग्यता का प्रदर्शन कर सकता है ।


   
 
 
 
   
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